January 11, 2023

सोशल सेक्टर के लिए बढ़िया प्रशासन क्यों ज़रूरी है?

बढ़िया प्रशासन का मतलब केवल नियमों का पालन नहीं होता बल्कि अपने हितधारकों और सहभागियों का भरोसा हासिल करना भी होता है, इसके लिए संगठन इन पांच बातों का ध्यान रख सकते हैं।
5 मिनट लंबा लेख

गवर्नेंस या प्रशासन शब्द का अर्थ है, किसी संगठन को चलाने का काम या तरीका। इसके लिए संचालन या व्यवस्था शब्द का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। यह उस नेतृत्व और प्रबंधन से अलग है जहां प्रशासन ‘प्रबंधकों का प्रबंधन करता है’। जहां प्रबंधक संगठन में हर दिन का कामकाज सम्भालते हैं, वहीं प्रशासन उन सीमाओं को तय करता है जिनमें रहकर वे अपनी भूमिकाएं निभाते हैं।

डेवलपमेंट सेक्टर में एक अच्छे संचालन का मतलब होता है, समाजसेवी संगठन या सामाजिक व्यवसाय को निष्ठा और पारदर्शिता के साथ, उस उद्देश्य की तरफ लेकर जाना जिसके लिए इसकी स्थापना की गई थी।

सोशल सेक्टर में संचालन का क्या महत्व है?

सामाजिक संगठन अपना अधिकतर समय और ऊर्जा ज़मीन पर लोगों का जीवन बदलने में खर्च करते हैं। उनके लिए उनके कार्यक्रम और उनके लोग ही सबसे अधिक मायने रखते हैं। इसलिए नियम-क़ायदे बनाने और संचालन के बेहतर तरीके तय करना उनकी वरीयता सूची में नहीं होता है। 

हालांकि मज़बूत नीतियों और भीतरी नियंत्रण का संबंध केवल नियमों का पालन करने से नहीं होता है। ये आपके दानदाताओं, भागीदारों और यहां तक ​​कि उन लोगों का भरोसा जीतने के लिए भी जरूरी है जिनके साथ आप काम करते हैं।

ऐसे संगठन जिनका संचालन उचित तरीक़े से नहीं किया जाता है, उन्हें अपने सीमित संसाधनों के अनुचित खर्च, आय में कमी और धोखाधड़ी का अधिक जोखिम होने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इससे भीतरी और बाहरी, दोनों ही तरह के लोगों का संगठन पर भरोसा कम होता है। और, एक बार जब भरोसा टूट जाता है और छवि ख़राब हो जाती है, फिर इसे दोबारा बना पाना लगभग असंभव होता है।

प्रशासन, इसीलिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह आपकी विश्वसनीयता स्थापित करता है जो आपके दानदाताओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। इससे उन्हें बेहतर फैसले लेने में मदद मिलती है, पारदर्शिता का स्तर बेहतर होता है और यह सुनिश्चित होता है कि आपका संगठन अपने लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है।

अच्छे प्रशासन में पांच चीजें ज़रूर होती हैं। और भले ही आपका संगठन एक सीमित संसाधनों वाला छोटा सा संगठन ही क्यों न हो, इन्हें लागू करना बहुत आसान होता है।

1. एक प्रशासनिक इकाई

यह आमतौर पर एक बोर्ड होता है। यह या तो ट्रस्टी सदस्यों का बोर्ड होता है या निदेशकों का बोर्ड जिनकी भूमिका निर्देशन एवं नियंत्रण करना होता है। अपना बोर्ड बनाते समय आपको दो महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • आपके बोर्ड के सदस्यों को अपनी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों की जानकारी होनी चाहिए ताकि वे प्रभावी तरीक़े से इसे निभा सकें।
  • आपके बोर्ड का आकार ‘सही’ होना चाहिए। इस बात को सुनिश्चित करें कि इसमें कुशल, सक्षम और अनुभवी लोगों का एक उचित अनुपात हो जो आपके संगठन को उस सामाजिक बदलाव को लाने में मदद करें, जो इसका उद्देश्य है। क़ानून के अनुसार सदस्यों/ट्रस्टी की न्यूनतम संख्या दो होती है। लेकिन बोर्ड का आकार वास्तव में संगठन के आकार और अच्छे प्रदर्शन के सुझाव और सलाहों की जरूरत पर निर्भर करता है।

आपको नियमित रूप से बोर्ड मीटिंग का आयोजन करना चाहिए। यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बोर्ड के सदस्यों/ट्रस्टियों को इतनी मात्रा में जानकारियां दी जा रही हैं कि वे सही फ़ैसले ले सकें। हर तीन साल में बोर्ड का मूल्यांकन होना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपका बोर्ड प्रभावी एवं प्रासंगिक दोनों है। यह काम आंतरिक रूप से या किसी बाहरी एजेंसी के जरिए किया जा सकता है।

2. नीतियां एवं प्रक्रियाएं

इसकी शुरुआत एक स्पष्ट उद्देश्य, लक्ष्य और मूल्यों को बताने वाले कथन होते हैं जो कर्मचारियों को संगठन के उद्देश्य से जुड़ी दिशा एवं स्पष्टता प्रदान करते हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित करते हैं कि आपकी टीम हमेशा आपके संगठन के लक्ष्यों से जुड़ी हुई है।

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एक प्रभावी नियंत्रण व्यवस्था प्रोटोकॉल को स्थापित करती है, धोखाधड़ी और ग़लतियों को रोकती है और उनका पता लगाती है। | चित्र साभार: निक यंगसन

हालांकि इतना होना भर काफ़ी नहीं है। संगठन के रोजमर्रा के कामकाज के लिए स्पष्ट रूप से लिखित नीतियों और प्रक्रियाओं का एक सेट होना चाहिए। नीतियों का काम किसी संगठन के महत्वपूर्ण पहलुओं, जैसे मानव संसाधन, वित्तीय प्रबंधन, खर्च, खरीद, अधिकारों के बंटवारे, हितों के टकराव से जुड़े प्रबंधन के लिए सिद्धांत निर्धारित करना होता है।

प्रक्रियाएं इन नीतियों को लागू करने के लिए विस्तृत निर्देश तय करती हैं। उदाहरण के लिए खर्च की भरपाई का दावा कैसे करें, छुट्टी कैसे लें, एडवांस कैश कैसे सेटल करें, वगैरह। नीतियां और प्रक्रियाएं, मिलकर आपके सभी कर्मचारियों और हितधारकों के बीच नियमित संवाद तथा बेहतर कामकाज को सुनिश्चित करती हैं।

3. आंतरिक नियंत्रण

एक प्रभावी नियंत्रण व्यवस्था प्रोटोकॉल को स्थापित करती है, धोखाधड़ी और ग़लतियों को रोकती है और उनका पता लगाती है। साथ ही, यह आपदा प्रबंधन में मददगार साबित होती है और सुनिश्चित करती है कि फायनेंशियल आंकड़े सटीक हों। नियंत्रण आपके बोर्ड को यह विश्वास भी दिलाता है कि आपके संगठन का प्रबंधन कैसे किया जा रहा है।

इसका एक उदाहरण, फ़ायनेंस और ख़रीदी के कामों को अलग-अलग करना है। विक्रेताओं के साथ अनुबंध पर बातचीत करने वाला व्यक्ति, भुगतान करने वाले व्यक्ति से अलग होना चाहिए। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भुगतान को मंजूरी देने वाली टीम और विक्रेता के बीच अलग से किसी तरह की सांठगांठ न हो। हालांकि, छोटे आकार वाली टीमों में अधिकारी एक प्रक्रिया में कई तरह के काम करते हैं। ऐसे मामलों में, एक मजबूत निगरानी और समीक्षा तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए। यह सीनियर मैनेजर या उन गतिविधियों को मंज़ूरी देने वाला निदेशक हो सकता है।

4. भूमिकाएं एवं जिम्मेदारियां

अपने कर्मचारियों की भूमिकाओं को रेखांकित करने और संगठन चार्ट को जल्दी स्थापित करने के महत्व के बारे में कोई भी संगठन साफ बातचीत नहीं करता है। भूमिकाएं स्पष्ट होनी चाहिए, बातचीत के विषय और रिपोर्टिंग का स्पष्ट दस्तावेज़ीकरण महत्वपूर्ण है।

इससे यह सुनिश्चित होता है कि कर्मचारी उनसे की जाने वाली अपेक्षाओं को लेकर स्पष्ट हैं। इससे उन्हें अपनी भूमिकाओं और कामों को लेकर जवाबदेह बनाए रखने में आसानी होती है। उदाहरण के लिए, एक कैशियर को यह सुनिश्चित करना होता है कि नक़द लेनदेन का ब्योरा सही तरीक़े से दर्ज किया जाए। क्योंकि बाद में इसके लिए उसे ही ज़िम्मेदार माना जाएगा। 

5. वित्तीय रिपोर्टिंग और पारदर्शिता

अंत में, बढ़िया प्रशासन सीधे आपके संगठन द्वारा दिखाए गए पारदर्शिता के स्तर से संबंधित होता है। यदि आपका संगठन तथ्यों और वित्तीय जानकारियों की रिपोर्टिंग नियमित अंतराल पर ठीक से करता है तो इससे बाहरी हितधारकों- जैसे दाताओं, भागीदारों और मीडिया का विश्वास बढ़ता ही है।

वित्तीय रिपोर्ट में आय, लागत, शुल्क आदि जैसे आंकड़ों पर ज़ोर दिया जाता है। आप इसका उपयोग गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं को प्रकट करने और इन आंकड़ों तक ले जाने वाली, संगठन की गतिविधियों के बारे में बताने के लिए भी कर सकते हैं। 

इसलिए वित्तीय रिपोर्ट आपके हितधारकों को केवल आपके संगठन के वित्तीय स्वास्थ्य के बारे में ही नहीं बताती हैं। बल्कि पिछले प्रदर्शन के साथ उचित तुलना के जरिए आपके प्रभाव के उद्देश्यों की दिशा में विकास और प्रगति का संकेत भी देती हैं।

कुल मिलाकर, अपने संगठन में बढ़िया प्रशासन को कामकाज का तरीक़ा बनाने से और भी कई फ़ायदे हैं। आख़िरकार, किसी का भरोसा हासिल करना छोटी बात नहीं है।

डिस्क्लेमर: संध्या इंडिया डेवलपमेंट रिव्यू की बोर्ड की सदस्य हैं।

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लेखक के बारे में
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संध्या राव

संध्या राव चार्टर्ड एकाउंटेंट और वित्त विशेषज्ञ हैं। इनके पास कॉर्पोरेट और डेवलपमेंट सेक्टर में काम करने का 18 से अधिक वर्षों का अनुभव है। इन्होंने RSM & Co, EY, प्राइस वॉटरहाउस कूपर और दसरा के साथ काम किया है। व्यवसायों के संचालन और फ़ायनेंस एंड एकाउंट्स पर इनके प्रभाव को लेकर संध्या की समझ बहुत गहरी है। सोशल सेक्टर में काम के दौरान संध्या ने संगठनात्मक और प्रोग्राम बजट को विकसित किया और उस पर अपनी नज़र बनाए रखी। इसके अलावा, वे बोर्ड और डोनर रिपोर्टिंग के साथ-साथ डोनर ऑडिट का काम भी सम्भालती थीं। उन्होंने विभिन्न विभागों में प्रशासन प्रक्रियाओं और प्रणालियों को स्थापित करने और उन्हें मजबूत बनाने के लिए भी काम भी किया है।

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