पंचायती राज
साझा संसाधनों के लिए क्यों ज़रूरी है सामुदायिक डेटा?
समुदायों का कॉमंस से पुराना रिश्ता है, जिसमें उनकी मौखिक परंपराएं, अनुभव और ज्ञान शामिल हैं। सवाल यह है कि क्या डेटा प्रणालियां इस रिश्ते को अहमियत देने के लिए तैयार हैं?पंचायतों से जुड़ी संस्थाएं सरकारी पोर्टल्स का बेहतर इस्तेमाल कैसे करें?
अगर कोई संस्था अपने फील्ड सर्वेक्षण, समुदाय की बातचीत या स्थानीय अनुभवों की तुलना सरकारी आंकड़ों से करती है, तो उसे क्षेत्र की स्थिति को अधिक गहराई से समझने में मदद मिलती है।कॉमन्स और बाजार के बीच कहां खड़े हैं वन आश्रित समुदाय?
समुदायों की बाज़ार में समान भागीदारी सुनिश्चित करने वाली व्यवस्थाओं को मजबूत करने के साथ यह तय करना भी जरूरी है कि वन और प्रकृति, बाजार की ताकतों के अधीन न हो जाएं।भारत की पंचायती राज व्यवस्था की स्थिति
पंचायती राज मंत्रालय ने “स्टेटस ऑफ डीवोल्यूशन टू पंचायत्स इन स्टेट्स-एन इंडिकेटिव एविडेंस बेस्ड रैंकिंग” नाम से एक रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट विभिन्न संकेतकों के आधार पर यह आकलन करती है कि राज्यों ने पंचायतों को स्वशासी संस्थाओं के रूप में कार्य करने के लिए कितना सक्षम वातावरण तैयार किया है।ग्राम से गणतंत्र तक: लोकतंत्र की असली यात्रा
गणतंत्र की मौजूदा वास्तविकता से स्पष्ट है कि ग्राम संसाधनों का सरकारीकरण और ग्राम शासन के विकेंद्रीकरण के बीच असंतुलन है।स्वास्थ्य और विकलांगता पर काम कर सशक्त होती पंचायतें
स्वास्थ्य क्षेत्र और विकलांगजन हित में काम करने से ग्राम पंचायतें प्रभावी और संवेदनशील बनती है, जिससे उनका सशक्तिकरण होता है।समुदाय अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए सत्याग्रह कैसे करें?
छत्तीसगढ़ में बीते 12 सालों से चल रहा कोयला सत्याग्रह कुछ सीखें देता है जिनकी मदद से पर्यावरण की रक्षा के लिए एक मज़बूत जन-आंदोलन खड़ा किया जा सकता है।एफआरए के तहत सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों का दावा कैसे कर सकते हैं?
विभिन्न राज्यों में एफआरए पर काम कर रहे दो जानकारों से जानिए कि आदिवासी समुदायों तक उनके वन अधिकार पहुंचाने की प्रक्रिया और चुनौतियां क्या हैं।