March 24, 2022

सफल प्रस्ताव लेखन के तरीके

स्वयंसेवी संस्थाओं के लिए फंडरेजिंग पर एक आजमाया और परखा हुआ गाइड।
8 मिनट लंबा लेख

सामाजिक क्षेत्र में फंडरेजिंग (धन उगाहने) के कई दृष्टिकोण हैं। क्राई, अक्षय पात्र, ग्रीनपीस और यूनिसेफ़ जैसे संगठन खुदरा फंडरेजिंग के पथप्रदर्शक रहे हैं। मिलाप और केटो जैसे नए डिजिटल बिचौलिये भी बाजार में आ चुके हैं। मैजिक बस भारत में फंडरेजर गाला प्रारूप को अपनाने वाला सबसे पहला संगठन है, और दसरा या गिव इंडिया जैसे संगठन उच्च-आय-संपत्ति वाले लोगों (एचएनआई) के लिए विश्वनीय मध्यस्थों के रूप में काम करते हैं।

इसके अलावा एडुकेट गर्ल्स जैसे भी संगठन हैं जो पूरी तरह से संस्थागत फंडरेजिंग पर भरोसा करते हैं। इसके लिए हमें अपने लेख को स्पष्ट करने और विभिन्न प्रकार के संस्थागत फंडों जैसे फाउंडेशन, ट्रस्ट, उद्यम परोपकार, कॉर्पोरेट आदि के लिए आकर्षक प्रस्ताव लिखने की आवश्यकता है। इस तरह की केन्द्रित फंडरेजिंग रणनीति से हमारी लागत कम हो जाती है—हम अपने वार्षिक बजट का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा धन उगाहने पर खर्च करते हैं और हमारे पास धन उगाहने के लिए पाँच सदस्यों वाली एक टीम है।

12 वर्ष पहले जब हमनें शुरू किया था तब हमारा वार्षिक बजट 15 लाख रुपए था और तब से हर 15 से 18 महीने में हमनें इसे लगभग दोगुना किया है। हमारे जैसे कई स्वयंसेवी संस्थानों के लिए इस तरह का विकास एक चुनौती लेकर आता है। क्योंकि हम न केवल पुराने दानकर्ताओं को बनाए रखते हैं बल्कि तेजी से बढ़ते बजट की पूर्ति के लिए नए दानकर्ताओं की खोज में भी लगे रहते हैं। इसलिए धन उगाहने के लिए एक सफल रणनीति बहुत अधिक महत्वपूर्ण है और ऐसी रणनीति में एक अच्छा प्रस्ताव और एक शानदार टीम का समर्थन शामिल है।

सफल प्रस्ताव के तत्व

इतने सालों में हमनें कई ऐसे मुख्य घटकों की पहचान की है जो हमारे सभी प्रस्तावों में शामिल हुए हैं और जो आगे जाकर अनुदान में परिवर्तित हो गए हैं। हमारे अनुभव से हमनें यह जाना है कि किसी प्रस्ताव में कुल चार प्रश्नों के उत्तर मौजूद होने चाहिए।

फेसबुक बैनर_आईडीआर हिन्दी

1. हम किस समस्या का समाधान करने की कोशिश कर रहे हैं?

जब हम किसी नए दानकर्ता से संपर्क करते हैं तब सबसे बड़ी जरूरत उस समस्या के स्पष्टीकरण की होती है जिसे हम सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। अगर आप अपनी आँखें बंद करते हैं तब आपको समस्या और समाधान दोनों दिखने चाहिए। हम लोग इसे ‘सफलता की दृष्टि’ कहते हैं। उदाहरण के लिए जब हम एडुकेट गर्ल्स के मामले में अपनी आँखें बंद करते हैं तब हमें यह दिखता है कि एक छोटी लड़की सुबह 5 बजे से जागकर पानी लाने जाती है, घर का सारा काम करती हैं। वह स्कूल नहीं जाती है। उसकी शादी जल्दी हो गई है और चूंकि उसकी शादी जल्दी हो गई है इसलिए उसके बच्चे भी जल्दी पैदा हो गए हैं। वह शिक्षित नहीं है और उसके बच्चों के भी स्कूल जाने की संभावना बहुत कम है। इसलिए निरक्षरता और गरीबी का अंतर-पीढ़ी चक्र कायम रहता है। सफलता की हमारी दृष्टि बहुत अधिक स्पष्ट है: यह लड़की स्कूल में है, वह स्कूल में रहती है, दोस्त बनाती है, उसके आसपास मदद करने वाले लोग हैं और वह पढ़ना और लिखना सीखती है।

हमें पूछना चाहिए: क्या एक 10–12 साल की उम्र का बच्चा संगठन के इस काम को समझने में सक्षम है?

समस्या को समझने के दौरान हमें खुद से यह सवाल करना चाहिए: क्या 10-12 साल की उम्र का बच्चा संगठन के काम को समझने में सक्षम है? एक क्षेत्र के रूप में हम बहुत अधिक शब्दजाल का इस्तेमाल करते हैं, जिससे लोगों में संशय पैदा हो सकता है। स्पष्टता और सरलता ही मुख्य कुंजी है। 

इसका दूसरा भाग है इस बात पर ज़ोर देना कि इस समस्या को हल करना महत्वपूर्ण क्यों है। व्यक्तिगत स्तर पर इसे स्पष्ट करना और व्यापक प्रभाव की व्याख्या दोनों ही महत्वपूर्ण है। लड़कियों की शिक्षा के लिए, हम लोग कुछ तथ्यों का उपयोग करते हैं: लड़कियों को शिक्षित करने से विकास के 17 सतत लक्ष्यों में से नौ लक्ष्यों को हल करने में मदद मिलती है—कुपोषण से बच्चे और मातृ मृत्यु दर, आजीविका और यहाँ तक कि जलवायु परिवर्तन की लड़ाई भी। हमारे लिए एक मजबूत मामला दोनों ही चीजों की व्याख्या करता है, लड़कियों के शिक्षित होने का व्यक्तिगत अधिकार, और उसके परिवार पर कई स्तरों पर पड़ने वाले इसके प्रभाव, व्यापक समुदाय और यहाँ तक कि राष्ट्रीय जीडीपी भी। हम यह भी बताते हैं कि इस समस्या के समाधान की आवश्यकता क्यों है और इसमें हस्तक्षेप न करने में क्या खतरा है। 

2. हम क्या कर रहे हैं?

एक बार जब आप समस्या और इसे हल करने के कारण को लेकर स्पष्ट हो जाते हैं, उसके बाद अगले चरण में यह बताना होता है कि संगठन इस समस्या को हल करने के लिए क्या कर रहा है। जहां तक हमारी बात है, हम लोग गाँव में स्कूल के बाहर की लड़कियों की पहचान करते हैं, उनका स्कूल में नामांकरण करवाते हैं, सुनिश्चित करते हैं कि उनका स्कूल ‘लड़कियों के अनुकूल’ है (उदाहरण के लिए उनके लिए अलग शौचालय है) और यह भी कि विद्यार्थी सीख रहे हैं और उम्र में बड़ी लड़कियों को जीवन-कौशल का प्रशिक्षण दे रहे हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण विचार यह है कि आप अपने मॉडल के लिए साक्ष्य तैयार करें। हमारा अंतिम मूल्यांकन एक तीसरे पक्ष द्वारा किया गया यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण (आरसीटी) था, जिसे अब हम अपने दानकर्ताओं को यह दिखाने के लिए पेश करते हैं कि हमारा मॉडल काम करता है।

बल्बों की एक पंक्ति जिसमें एक बल्ब जला हुआ है_पिक्साबे-फंडरेजिंग प्रपोजल
एक सफल फंडरेजिंग रणनीति में सफल होने वाले प्रस्ताव के साथ प्रधान टीम का समर्थन भी शामिल होता है। | चित्र साभार: पिक्साबे

3. हमारे मुख्य ताकत क्या है?

दानकर्ताओं द्वारा कई प्रस्तावों की समीक्षा करने की संभावना होती है जो अक्सर समान समस्याओं का समाधान करते हैं। यह बताना आवश्यक है कि ‘आप क्यों?’ इस चुनौती के समाधान के लिए आप सही आदमी या सही संगठन क्यों हैं? किसी संगठन या कार्यक्रम की मुख्य ताकत जमीन पर उसका वितरण, उसका नेतृत्व, उसका बोर्ड, प्रौद्योगिकी का उपयोग, और इसी तरह के अन्य तत्व हो सकते हैं। अपनी मजबूती की पहचान करना, उनके बारे में विस्तार से बताना और उनमें निवेश करके उन्हें विकसित करना बहुत महत्वपूर्ण है। और बेशक इसके अलावा प्रस्ताव में इन्हें स्पष्टता से रेखांकित करना भी।

4. इसलिए प्रस्ताव के लिए मुख्य विचार क्या है?

अंत में, ऊपर के सभी बिन्दुओं को एक साथ लाकर आप अपने प्रस्ताव के मुख्य विचार को परिभाषित करें। एडुकेट गर्ल्स के लिए यह कुछ इस तरह का है: हम दो ‘पी’ यानी गरीबी (पोवर्टी) और पितृसत्ता (पेट्रीआर्की) पर ध्यान केन्द्रित करेंगे और स्कूल न जाने वाली लड़कियों की समस्या का समाधान करने के लिए एक साक्ष्य-, आंकड़ा- और तकनीक-आधारित मॉडल लेंगे, जो समुदाय में निहित है। उन्नत विश्लेषिकी के माध्यम से हम लोग भारत के ऐसे पाँच प्रतिशत गांवों की पहचान करेंगे जो सबसे अधिक हाशिये पर हैं और जहां जनसंख्या की 40 प्रतिशत लड़कियां स्कूल नहीं जाती हैं, और हम अपने मॉडल को वहाँ लागू करेंगे।

दानकर्ता से निवेदन करने से पहले यह जानना जरूरी है कि इससे पहले उन्होनें किस तरह की परियोजनाओं में दान किया है।

यहाँ बताए गए चरणों के अतिरिक्त, एक सफल प्रस्ताव के निर्माण में शोध के महत्व को नहीं भूल सकते हैं। एक संभावित दानकर्ता से निवेदन करने से पहले उनके इतिहास, उनके द्वारा निवेश किए गए कार्यक्रमों और परियोजनाओं के प्रकार, परियोजनाओं के आकार और उनके निवेश की अवधि, उनकी भौगोलिक और क्षेत्रीय पसंद आदि के बारे में जानकारी हासिल करना महत्वपूर्ण है। कुछ दानकर्ताओं को अधिकार-आधारित दृष्टिकोणों पर देखा जा सकता है, जबकि अन्य दानकर्ता आपके कार्यक्रम के आर्थिक विकास पर होने वाले नॉक-ऑन प्रभाव में कहीं अधिक रुचि ले सकते हैं। इसके अलावा कुछ अन्य दानकर्ता व्यवस्था-परिवर्तन के नजरिए को अपना सकते हैं। यह जानना महत्वपूर्ण है और इसके अनुसार ही हमें अपना प्रस्ताव तैयार करना चाहिए।

इस तरह के सभी शोध करने के बाद अब आप कोशिश कर सकते हैं और ऐसे दानकर्ता ढूंढ सकते हैं जो सफलता के आपके नजरिए को समझता है और आपके मुख्य उद्देश्य के अनुकूल सोचता है। हमारे लिए इस तरीके के सफल होने का एक कारण यह भी है कि हमारे वर्तमान दानकर्ता अक्सर हमें ऐसे नए दानकर्ताओं से मिलवाते हैं जिनकी सोच हमारे मिशन के अनुकूल होती है।

प्रस्ताव से परे: प्रधान टीम का समर्थन

धन उगाहने का अभ्यास सिर्फ एक अच्छा प्रस्ताव लिख लेना और संगठन के विभिन्न सदस्यों द्वारा अपनी भूमिका निभा लेना नहीं है। यहाँ हम अपने कुछ अनुभव साझा कर रहे हैं:

संस्थापकों पर निर्भर रहें

हमारे पास पांच सदस्यीय धन उगाहने वाली टीम है जो विभिन्न हितधारकों से आंकड़ें एकत्र करने के लिए प्रस्ताव लिखने, शोध करने, बातचीत करने से लेकर हर चीज का ध्यान रखती है। हालाँकि, कोई भी संगठन कितना भी व्यवस्थित या प्रक्रिया-संचालित क्यों न हो, इसके लिए समय-समय पर संस्थापकों पर निर्भर रहना महत्वपूर्ण है।

संस्थापक संगठन के दृष्टिकोण को व्यक्त करने का काम अच्छे ढंग से कर सकते हैं, और दानकर्ता अक्सर संस्थापकों से जुड़ते हैं और आश्वस्त होते हैं। एक अनुमान के अनुसार, हमारे संस्थापक अपना 25 प्रतिशत समय धन उगाहने के काम में लगाते हैं — इसके लिए वे चाहे दानकर्ता से या संस्था के प्रमुख से बात करते हैं या दानकर्ताओं के बोर्ड के सामने अपना प्रस्ताव पेश करते हैं। और चूंकि हमारे कई दानकर्ता कई सालों से हमसे जुड़े हैं इसलिए हमारा उनसे गहरा संबंध है और संस्थापक इन रिश्तों को बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

बोर्ड पर भरोसा करें

प्रस्ताव भेजने और उनकी तरफ से फोन आने का इंतजार करने के बजाय हम हमेशा एक दानकर्ता के सामने गर्मजोशी के साथ अपना परिचय देना पसंद करते हैं। हम किसी संस्था तक पहुँचने के लिए अपने बोर्ड, अपने सलाहकार परिषद और अपने वर्तमान दानकर्ताओं के ऊपर भरोसा करते हैं—ज़रूरी नहीं है कि हमारे बारे में सकारात्मक बातें करें बल्कि कोष जुटाने से संबंधित हमारी कोशिशों को लेकर किसी विचार पर चर्चा भी हो सकती है।

यही वह जगह है जहां बोर्ड की भूमिका वास्तव में महत्वपूर्ण हो जाती है। जो एडुकेट गर्ल्स में अक्सर धन उगाहने में सक्रिय भूमिका निभाने पर ज़ोर देते हैं, चाहे वह गर्मजोशी से अपना परिचय देना हो या फोन करके हमारी मदद करनी हो और दानकर्ताओं से पूछे जाने वाले सवालों का जवाब देना हो। यह महत्वपूर्ण है कि बोर्ड के निर्माण के समय धन उगाहने की उम्मीद की बात स्पष्ट कर दी जाए। संभव है कि आप अपने बोर्ड में किसी दानकर्ता को न रखना चाहें लेकिन आपको लोगों के ऐसे संतुलन की जरूरत पड़ेगी जो अपने अनुभव के माध्यम से विश्वसनीयता प्रदान करते हैं (चाहे वह अकादमिक, सरकारी, वित्तीय या कुछ और ही हो)। ऐसे लोग जो संभावित दानकर्ताओं के अपने नेटवर्क को खोलें, और जो आपकी जगह लेकर आत्मविश्वास के साथ आपकी बात कह सकें। भले ही उनके पास अपना नेटवर्क न हो, उनके पास उद्देश्य के लिए जुनून होना चाहिए, संगठन के बारे में गहरा ज्ञान और एक तरह की वरिष्ठता होनी चाहिए जो इसके प्रभाव से उत्पन्न होती है।

धन उगाहने वाली टीम का निर्माण: मिशन संरेखण बनाम कौशल का सेट

हम हमेशा मिशन संरेखण पर निर्भर रहते हैं—कोई ऐसा आदमी जो आपके मिशन को लेकर जुनूनी हो, जो जुनून के साथ संवाद कर सके, और रिश्ते बनाने वाला हो और लोगों का आदमी हो। आप किसी ऐसे आदमी को चाहते हैं जो आपकी बात अच्छे से रख सके, नेतृत्व करे और तार्किक बातचीत का निर्माण करे। बाकी का हिस्सा अँग्रेजी है; आप एक ऐसे आदमी को ढूँढ ही लेंगे जो अच्छी अँग्रेजी लिखता है। महत्वपूर्ण यह है कि आप अपने मिशन और उस प्रभाव के प्रति प्रामाणिक हों, जिसके पीछे आप भाग रहे हैं—भाषा की निखार, चार्ट और ग्राफ साथ में आ जाएंगे।

अंतत:, धन उगाहना आपके काम और दुनिया में आपके द्वारा लाए गए बदलाव के बारे में है। अगर कार्यक्रम जमीनी स्तर पर पर्याप्त प्रभाव नहीं डाल रहा है तो एक अच्छी रणनीति और धन उगाहने वाली टीम को धन उगाहने के लिए संघर्षरत रहना पड़ेगा। हालांकि धन उगाहने के लिए सही दृष्टिकोण या सफलता की स्पष्ट दृष्टि के अभाव में प्रभावशाली कार्यों को अनदेखा भी किया जा सकता है। 

चर्चा 2020 में, महर्षि और सफीना ने इस बारे में बात की कि कैसे एक सामाजिक प्रभाव के विचार को एक सफल प्रस्ताव बनाया जा सकता है

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अधिक जानें

  • उन दिशा-निर्देशों को पढ़ें जिनका पालन सामाजिक परिवर्तन के नेता दानकर्ताओं से ‘बड़ा दांव’ निवेश आकर्षित करने के लिए कर सकते हैं।
  • स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा धन उगाहने के लिए उपकरणों, रणनीतियों, सर्वोत्तम प्रथाओं, अभ्यासों, संदर्भों और अन्य संसाधनों की इस कार्यपुस्तिका को विस्तार से पढ़ें।
  • उन आठ चरणों को समझें जिनका पालन गैर-लाभकारी संस्थाएं कोविड-19 महामारी के दौरान सफल धन उगाहने के लिए कर सकती हैं।

अधिक करें

  • कोविड-19 के समय में संबंध आधारित फंडरेजिंग पर इंडियन लीडर्स फ़ॉर सोशल सेक्टर द्वारा आयोजित इस वेबिनार को देखें।

लेखक के बारे में
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सफ़ीना हुसैन

सफ़ीना हुसैन एडुकेट गर्ल्स की संस्थापक और बोर्ड की सदस्य हैं। एडुकेट गर्ल्स 2007 से भारत के सबसे अधिक हाशिए पर रहने वाले ग्रामीण इलाकों में लिंग और साक्षरता में आई कमी को कम करने के क्षेत्र में काम करने वाली एक स्वयंसेवी संस्था है।

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महर्षि वैष्णव

महर्षि वैष्णव एडुकेट गर्ल्स में चीफ ऑफ स्टाफ हैं, जहां वह संस्थापक-सीईओ को उनकी रणनीतिक दृष्टि प्रदान करने में सहायता करते हैं। एडुकेट गर्ल्स से पहले, महर्षि दक्षिण पूर्व एशिया में ग्रामीण फाउंडेशन के साथ एक शोध फेलोशिप पर थे, जहां उन्होंने महिला सूक्ष्म उद्यमियों के लिए मोबाइल प्रौद्योगिकी समाधानों का मूल्यांकन किया। अंतर्राष्ट्रीय विकास में जाने से पहले, महर्षि ने निजी क्षेत्र में विभिन्न भूमिकाओं में एक दशक बिताया। उनके पास सार्वजनिक नीति और व्यवसाय में स्नातक की डिग्री है।

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