प्राकृतिक असंतुलन और मानवीय हस्तक्षेप ने मिलकर भारत में बाढ़ के जोखिम को लगातार गहरा किया है। यह वार्षिक आपदा अब सामाजिक-आर्थिक क्षति का प्रमुख स्रोत बन चुकी है।
इस वीडियो में जलवायु संकट के बढ़ते प्रभावों के बीच पांच अहम शब्दों—जलवायु अनुकूलन, शमन, न्याय, हानि व क्षति, और सहनशीलता—को आसान भाषा में समझाया गया है।
पैरामीट्रिक बीमा के साथ भारत का अनुभव अभी शुरुआती स्टेज में है और जानकारों के मुताबिक इसे बदलते मौसम के हिसाब से मौजूदा रणनीतियों को बेहतर करने वाला होना चाहिए।