आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर पोषण की एक और जिम्मेदारी

मैं 2011 से उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद ज़िले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में काम कर रही हूं। मेरे कंधों पर बच्चों को पढ़ाने, राशन वितरण करने, चुनाव की ड्यूटी करने, टीकाकरण अभियान चलाने, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पौष्टिक आहार का ध्यान रखने और नवजात शिशुओं की देखभाल जैसे अनगिनत कामों की जिम्मेदारी है।

आमतौर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को एक सहायक दिया जाता है जो बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर लाने और घर पहुंचाने में, कार्यकर्ता की अनुपस्थिति में केंद्र को संभालने जैसे तमाम कामों में उनकी मदद करता है। मेरे केंद्र पर काम करने वाली सहायक तीन साल पहले ही सेवानिवृत हो चुकी है और सरकार ने अब तक उसकी जगह पर किसी को नहीं भेजा है। इस कारण मुझे अकेले ही सारे काम सम्भालने में कठिनाई हो रही है। अगर मुझे किसी मीटिंग में जाना होता है तब बच्चों के साथ रुकने वाला कोई नहीं होता।

2021 से हमारे कंधों पर एक और जिम्मेदारी आ गई है। अब हमें छह साल तक के बच्चों का वजन और उनकी लम्बाई भी मापनी पड़ती है। उनके वजन और लम्बाई के इस आंकड़े को पोषण ट्रैकर ऐप पर दर्ज करना पड़ता है। यह ऐप छोटे बच्चों के पोषण की स्थिति पर नज़र रखता है और इससे कुपोषण से लड़ने में मदद मिलती है। हमें बताया गया था कि इस अतिरिक्त जिम्मेदारी के लिए हमें हर महीने अलग से कुछ पैसे दिए जाएंगे, लेकिन यह भुगतान नियमित नहीं है।

मेरी तनख़्वाह 5,500 रुपए है जो अपने आप में घर चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है। जब से पोषण ट्रैकर ऐप शुरू हुआ तब से किसी-किसी महीने मुझे 7,000 तो किसी महीने 8,000 रुपए मिलते हैं। हमें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि यह सिस्टम कैसे काम करता है और ना ही कोई इस बारे में बताने वाला है। बिना निश्चित राशि के मुझे अपने मासिक खर्च की योजना बनाने में दिक्कत आती है। 

मैं ना तो वास्तविक रूप से एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता और ना ही एक शिक्षक का काम कर रही हूं। मैं चाहती हूं कि सरकार मुझे एक शिक्षक बना दे क्योंकि पढ़ाना मुझे पसंद है। मुझे लगता है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को अपने काम के लिए कम से कम 15-20,000 रुपए की तनख़्वाह और रिटायरमेंट पर कुछ धनराशि तो मिलनी ही चाहिए। 

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अनीता रानी उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद ज़िले में एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं।

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