मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर राजनगर तहसील के जमुनिया गांव का यह प्रसंग, क्षेत्र में व्याप्त सामाजिक विषमता और संरचनात्मक सीमाओं को उजागर करता है। इस गांव में आज भी जातिगत भेदभाव और छुआछूत की प्रथाएं इतनी गहराई से रची-बसी हैं कि लोग एक ही कुएं से सामूहिक रूप से […]
साल 2025 की गणतंत्र दिवस परेड में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ‘स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास’ थीम पर अपनी झांकियां प्रस्तुत कीं। इस थीम को बुंदेलखंड में एक अनोखे तरीके से साकार किया जा रहा है। यहां 8वीं से 17वीं शताब्दी के बीच बने पारंपरिक जलाशयों का पुनरोद्धार कर विरासत और प्रगति […]
मध्य प्रदेश में, क्षेत्रफल के लिहाज से भारत का सबसे बड़ा जंगल फैला हुआ है। इसी राज्य में सबसे अधिक अनुसूचित जनजाति आबादी निवास करती हैं। यहां के वन क्षेत्रों में विविध आदिवासी समुदाय रहते हैं, जिनमें गोंड, बैगा और कोरकू प्रमुख हैं। आदिवासी सहकारी विपणन विकास फेडरेशन ऑफ इंडिया (ट्राइफेड) के अनुसार मप्र, ओडिशा […]
समाजसेवी संस्था प्रदान द्वारा जनवरी में जारी की गई, आदिवासी आजीविका की स्थिति रिपोर्ट, 2022 मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदायों की बात करती है। रिपोर्ट के लिए, इन राज्यों के 22 ज़िलों के 55 ब्लॉकों में 6019 परिवारों का सर्वेक्षण किया गया था। इनमें 4745 आदिवासी, 393 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुदाय […]
मध्य प्रदेश, देश की सबसे अधिक अनुसूचित जनजाति आबादी वाला राज्य है। आमतौर पर आदिवासी समुदायों की आजीविका का प्रमुख साधन खेती-किसानी और जंगलों से मिलने वाले उत्पाद (वनोपज) होते हैं। लेकिन बीते कुछ समय से जनजातियों लिए जंगल के जरिए अपनी आजीविका को चला पाना उतना आसान नहीं रह गया है। राज्य में आदिवासी […]