झारखंड

सब्जी के खेत में लताओं को बांधती दो महिलाएं_सामूहिक खेती
September 8, 2025
छोटे समूह, बड़ी संभावनाएं: सीमांत किसानों की नयी दिशा
सामूहिक खेती से किसान कम जमीन मिलाकर खेती कर सकते हैं, उपज बढ़ा सकते हैं और गुजर-बसर की खेती से आगे बढ़ सकते हैं।

भारत के मध्यवर्ती आदिवासी इलाकों में छोटे और सीमांत किसान, बढ़ती भूमि-हीनता, सिकुड़ते खेतों और बिखरी हुई जोत के कारण नई तरह के संकटों का सामना कर रहे हैं। यह स्थिति जलवायु परिवर्तन और खेती में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के चलते और जटिल हो जाती है, क्योंकि पुरुष बेहतर आय की तलाश में खेती […]

जंगल में वन उपज इकट्ठा करती महिलाएं_वन संरक्षण
August 12, 2025
जन गण वन
यह फिल्म झारखंड में वन संरक्षण और बहाली की दिशा में की गई सामुदायिक पहल को दिखाती है।

यह फिल्म पर्यावरण चेतना केंद्र की मदद से पूर्वी सिंहभूम, झारखंड में वन संरक्षण और बहाली की दिशा में की गई सामुदायिक पहल को दिखाती है। यह फिल्म ग्रीन हब सेंट्रल इंडिया (जीएचसीआई) फेलोशिप, डस्टी फुट फाउंडेशन और महाशक्ति सेवा केंद्र (एमएसके) की एक परियोजना के तहत बनाई गई है, जो डिजिटल माध्यम से पर्यावरण […]

ग्रीन हब | 2 मिनट लंबा लेख
मिट्टी की कलाकृति को तैयार करता कलाकार_डोकरा कलाकार
April 8, 2025
फोटो निबंध: अवसरों की कमी और आजीविका के संकट से जूझते डोकरा कलाकार
झारखंड के डोकरा कलाकार पीतल से सजावटी सामान और कलाकृतियां बनाते हैं, लेकिन अब उनके लिए इस कला को जारी रख पाना एक चुनौती बन गया है।

दुमका जिला, झारखंड के शिकारीपाड़ा ब्लॉक में पड़ने वाले जबरदाहा गांव के नवाज अली जादुपेटिया एक खानदानी डोकरा कलाकार हैं। वे अपनी कला का पूरा नाम डोकरा कास्टिंग आर्ट बताते हैं। 42 वर्षीय नवाज अली बताते हैं कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से यही काम करता आ रहा है और अब उनके बच्चे भी यह […]

राहुल सिंह | 5 मिनट लंबा लेख
गांव में बैठक करते कुछ लोग_जन-संगठन
November 20, 2024
जन-संगठन आर्थिक आत्मनिर्भरता कैसे हासिल कर सकते हैं?
जमीनी संगठनों के लिए समुदाय से रिश्ता बनाए रखना सबसे अधिक जरूरी है क्योंकि समुदाय, यदि संगठन की अहमियत समझेगा तो वह उसकी आर्थिक जरूरतों का भी खयाल रखेगा।

हमारे देश में हजारों छोटे-बड़े जन संगठन मौजूद हैं जो जनता के मुद्दों पर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। यहां जन-संगठन से अर्थ उन संस्थानों से है जो समुदायों के साथ सीधे जमीन पर काम कर रहे हैं। इन्हें समाजसेवी संस्थाओं या एनजीओ से अलग देखे जाने की जरूरत है। पारंपरिक संस्थाओं से अलग जन […]

फीचर फोटो सेल—सोशल इमोशनल लर्निंग
November 14, 2024
सामाजिक एवं भावनात्मक शिक्षा युवाओं के लिए क्यों जरूरी है?
सामाजिक एवं भावनात्मक शिक्षा यानि सेल, युवाओं को पढ़ाई के साथ-साथ उनके दैनिक जीवन की चुनौतियों का समाधान करने में भी मदद करता है।

अध्ययनों से पता चलता है कि युवाओं में तनाव, चिड़चिड़ेपन और डिप्रेशन के मामले बढ़ते जा रहे हैं और इसके चलते वे कई बार कुछ गंभीर कदम भी उठा लेते हैं। तनाव के कारणों में कठिन सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां, परेशान करने वाले पारिवारिक संबंध, स्कूल में दबाव और दैनिक कार्य जीवन में असंतुलन शामिल हैं। ऐसे […]

दयामनी बरला— दयामनी बरला से बातचीत
September 10, 2024
आईडीआर इंटरव्यूज | दयामनी बरला
झारखंड की आदिवासी कार्यकर्ता एवं पत्रकार दयामनी बरला बताती हैं कि कैसे वे जल, जंगल और जमीन से जुड़े आंदोलनों के जरिए लोगों को उनका हक दिलाने के लिए निरंतर संघर्ष करती रही हैं।

दयामनी बरला, एक आदिवासी कार्यकर्ता और पत्रकार हैं और हमेशा ही आदिवासी मुद्दों पर अपनी बात मुखरता से रखती आई हैं। इस इंटरव्यू में दयामनी बरला बताती हैं कि उनका बचपन भी बहुत संघर्षों से भरा रहा और उन्हें अपनी आजीविका चलाने के लिए खुद से संघर्ष करना पड़ता था।    दयामनी बताती हैं कि […]

मधु मंसूरी हंसमुख की तस्वीर_आदिवासी कलाकार
September 3, 2024
आईडीआर इंटरव्यूज | मधु मंसूरी हंसमुख
पद्मश्री सम्मान से नवाजे जा चुके लोकगीत कलाकार मधु मंसूरी हंसमुख ने आईडीआर के साथ अपनी बातचीत में बताया कि कैसे छोटी सी उम्र से ही इन्होंने लोकगीत को अपना हथियार बनाकर झारखंड आंदोलन को एक नई दिशा और चेतना प्रदान की।

बिहार में आदिवासियों के झारखंड आंदोलन से अपनी पहचान बनाने वाले मधु मंसूरी हंसमुख का नाम जितना दिलचस्प है, उनके जीवन का सफर भी उतना ही रोचक रहा है। बचपन से ही इन्हें लोकगीतों का शौक रहा है। आगे चलकर इन्होंने झारखंड बनने के आंदोलन में अपने गीतों के ही ज़रिये लोगों के बीच अपनी […]

हाथ ऊपर किये हुए कुछ लड़कियों का एक समूह_सामुदायिक भागीदारी
January 10, 2024
जिनके लिए शोध किए जा रहे हैं, उन्हें शोध में कैसे शामिल किया जाए?
जिन लोगों के साथ शोध किया जाता है उन्हें आमतौर पर डेटा के स्रोत के रूप में देखा जाता है, न कि उपयोगकर्ता के रूप में।

सामाजिक प्रभाव पैदा करने के लिए समर्पित शोधकर्ताओं के रूप में, हम अपने काम से प्रभावित होने वाले समुदायों के जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करते हैं। हालांकि, सर्वेक्षण में सवालों के जवाब देने के अलावा इन समुदायों को हमारी शोध प्रक्रियाओं में शायद ही कभी शामिल किया जाता है। अक्सर उनकी भूमिका डेटा […]

अक्षिता शर्मा | 14 मिनट लंबा लेख
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