उत्तर प्रदेश राजधानी लखनऊ से लगभग 130 किलोमीटर दूर बसा जिला कन्नौज इत्र नगरी के नाम से पूरी दुनिया में जाना जाता है। कई दशकों से इस शहर में फूलों से बने शुद्ध इत्र का व्यापार होता आ रहा है। इत्र बनाने की परम्परा यहां सदियों से चली आ रही है, जिसके चलते ही इसे […]
हाल के वर्षों में भारत में स्थानीय उद्यमिता को लेकर लोगों की सोच में तेजी से परिवर्तन आया है। आज सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र भारत की जीडीपी में 30 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है। हिंदी पट्टी के दर्शकों के बीच शार्क टैंक इंडिया जैसे कार्यक्रमों की लोकप्रियता दिखाती है कि […]
ललितपुर जिले में सदियों से पुरुषों के सामने चप्पल पहनकर निकलना महिलाओं के लिए बड़ी समस्या रही है। जब खेत जाती हैं तो चप्पल पहन लेती हैं लेकिन गांव के अंदर आते ही चप्पल उतार लेती हैं, ताकि मर्यादा भंग न हो। गांव में कोई महिला चप्पल नहीं पहनती। जहां एक तरफ महिलाएं पुरुषों से […]
हमारे देश में हजारों छोटे-बड़े जन संगठन मौजूद हैं जो जनता के मुद्दों पर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। यहां जन-संगठन से अर्थ उन संस्थानों से है जो समुदायों के साथ सीधे जमीन पर काम कर रहे हैं। इन्हें समाजसेवी संस्थाओं या एनजीओ से अलग देखे जाने की जरूरत है। पारंपरिक संस्थाओं से अलग जन […]
जलवायु परिवर्तन मज़दूरों की ज़िंदगी पर सबसे क्रूर प्रभाव डालता है और 2024 के पूर्वानुमान बता रहे हैं कि हीटवेव, सूखे और अनिश्चित मॉनसून की चरम मौसमी घटनायें इस सेक्टर को बहुत प्रभावित करेंगी। मार्च के पहले हफ्ते में ही देश के कई हिस्सों में तापमान 41 डिग्री के बैरियर को पार कर गया और […]
उत्तर प्रदेश के घने जंगलों वाले ज़िले लखीमपुर खीरी में, दुधवा नेशनल पार्क की स्थापना साल 1977 में की गई थी। तब से इलाके के थारू आदिवासी, अपने गांवों में बसे रहने के लिए वन विभाग के साथ संघर्ष कर रहे हैं। इन्हें विस्थापित करने का इरादा रखने के अलावा वन विभाग, वन संसाधनों जैसे […]
रौशनी बेगम उत्तरप्रदेश, भदोही ज़िले के मोहम्मदपुर गांव में रहती हैं। महज़ 15 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी लेकिन अपने पति के प्रोत्साहन से वे 12वीं कक्षा तक पढ़ाई कर सकीं। परिवार में सबसे बड़ा होने के कारण घर और पांच भाई-बहनों की ज़िम्मेदारी उनके पति पर आ गई जिसे रौशनी […]
उत्तर प्रदेश के नयागांव मोहम्मदपुर गांव की फूलबानो ज़री का काम करती हैं। अपने तीन बच्चों के साथ वे गांव में ही रहती हैं। जब से फूलबानो के पति काम की तलाश में दिल्ली गए हैं, तब से पूरे घर की जिम्मेदारी उनके कंधों पर ही आ गई है। वे कहती हैं कि “राजेश नाम […]