उत्तराखंड

जंगल की हरियाली में कुछ महिलायें_ पर्यावरण सखी 
December 4, 2025
पर्यावरण सखियां: जिनके जिम्मे है कचरा प्रबंधन से लेकर पर्यावरण की रखवाली तक
सहस्त्रधारा, उत्तराखंड में सक्रिय पर्यावरण सखियों का काम सिर्फ कचरा इकट्ठा करने और छांटने तक सीमित नहीं है बल्कि यह उनकी अपनी धरती-हवा-पानी को सुरक्षित और संरक्षित करने का भी प्रयास है।

उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में अक्सर खुले में कचरा जमा होता दिखाई देता है जो पानी के स्रोतों को प्रदूषित करता है। वहीं, जब इस कचरे को जलाया जाता है तो हवा प्रदूषित होती है। देहरादून का मशहूर पर्यटन स्थल सहस्त्रधारा भी इससे बचा नहीं हैं। कभी अपने निर्मल-ताजा झरनों के लिए जानी जाने वाली […]

लोगों से बात करती कार्यकर्ता_मानसिक स्वास्थ्य
March 4, 2025
सुनना, समझना, सहारा देना: मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता होने के मायने
उत्तराखंड के देहरादून में स्थित एक सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता की दिनचर्या, जो लोगों के साथ भरोसेमंद रिश्ता बनाकर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाती हैं।

मेरा नाम गीता है और मैं उत्तराखंड के देहरादून जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के तौर पर काम करती हूं। मैं यहीं पली-बड़ी हूं और वर्तमान में अपने पति के साथ रहती हूं। मैं 2022 से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था बुरांस के साथ काम कर रही हूं। यह संस्था […]

गीता शाक्या | 6 मिनट लंबा लेख
कच्ची झोपड़ी_प्रवासी मजदूर
July 15, 2024
फोटो निबंध: नानकमत्ता के मौसमी मछुआरे
हवा के टकराने से टूटती अस्थायी झोपड़ियों में रहने से लेकर मच्छरों से जूझने तक, उत्तराखंड के नानकसागर बांध पर डेरा डाले एक मौसमी मछुआरे का जीवन कठिन है। लेकिन चुनौतियों के साथ कुछ ईनाम भी मिलते हैं।

प्रदीप साना (45) अपने 20 मछुआरे दोस्तों के साथ, हर साल गर्मियों में उत्तराखंड के नानकसागर बांध के पास सूखी जमीन पर मछली पकड़ने के लिए नानकमत्ता आते हैं। प्रदीप कहते हैं – “मैं अपने घर से 30 किलोमीटर दूर सिर्फ़ मछली पकड़ने आया हूँ। यहां बहुत सारे मच्छरों के बीच और बिना रोशनी या […]

प्रकाश चंद | 5 मिनट लंबा लेख
बागान में काम कर रही महिलाएं-आदिवासी महिला नेता
March 8, 2023
फ़ोटो निबंध: भारत की आदिवासी महिला नेता क्या अलग कर रही हैं?
महिलाओं को सशक्त बनाने और युवा लड़कियों के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने से लेकर अपने लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने तक का काम कर रही आदिवासी नेताओं के जीवन की झलक।

2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की कुल आबादी का लगभग 8.6 फ़ीसद आबादी आदिवासी है। संविधान आदिवासी समुदायों को कुछ विशेष कानूनी प्रावधान प्रदान करता है। लेकिन फिर भी कई समुदाय शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और भूमि जैसे बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आदिवासी समुदायों का, इन अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए […]

श्रेया अधिकारी | 6 मिनट लंबा लेख